Ram Janmabhoomi Ayodhya ( राम जन्मभूमि अयोध्या )

मेरे पाठक आपको मेरा प्रेम पूर्वक नमस्कार हम अपने इस लेख में अयोध्या घूमने की संपूर्ण जानकारी देंगे |

Ram Janmabhoomi Ayodhya ( राम जन्मभूमि अयोध्या )

अयोध्या दर्शन ( श्री राम की जन्मभूमि )

अयोध्या की परिचय( Introduction of Ayodhya in Hindi ) : 

मेरे पाठक आपको मेरा प्रेम पूर्वक नमस्कार हम अपने इस लेख में अयोध्या घूमने की संपूर्ण जानकारी देंगे | दोस्तों अयोध्या उत्तर प्रदेश का एक जिला है, अयोध्या एक प्राचीन धर्म नगरी भी है अयोध्या पवित्र सरयू नदी के किनारे बसा है | इस नगर को मनु ने बसाया था, और इसे अयोध्या का नाम दिया था | जिसका अर्थ होता है अर्थाथ जहां कभी युद्ध नहीं होता है अयोध्या का प्राचीन नाम साकेत था |दोस्तों अयोध्या में सूर्यवंशी/ रघुवंशी राजाओं का राज्य हुआ करता था , जिसमें श्रीराम ने अवतार लिए थे अयोध्या सप्तपुरी में से एक है | सात पूरियां इस प्रकार है-  

  •  अयोध्या (उत्तर प्रदेश)  
  • मथुरा (उत्तर प्रदेश )
  • हरिद्वार( उत्तराखंड)  
  • काशी( उत्तर प्रदेश)
  • कांचीपुरम( तमिल नाडु )
  • उज्जैन( मध्य प्रदेश)
  •  द्वारका (गुजरात )

 अयोध्या की मुख्य भाषा अवधि है | दोस्तों अयोध्या प्रसिद्ध महाकाव्य रामायण की पृष्ठभूमि का केंद्र थी |

 अयोध्या की इतिहास ( History of Ayodhya in Hindi ) : 

Ayodhaya history

  • दोस्तों बेंटली एवं अन्य विद्वानों ने  ग्रह मंजरी  और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के आधार पर इसकी स्थापना काल 2200 ई. पू. के आसपास माना है | इस वंश के राजा श्री राम  के पिता दशरथ 63 वें शासक हैं |
  • दोस्तों अयोध्या का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण है, यहां पर भगवान श्री राम की जन्म एवं कर्म स्थली है |राम भरत मिलाप के पश्चात भरत खड़ाऊ लेकर अयोध्या मुख्यालय से 15 किलोमीटर दक्षिण में सुल्तानपुर रोड पर स्थित भारतकुंड नामक स्थान पर 14 वर्ष तक रहे |
  • दोस्तों वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है ,रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी |  यह पूरी सरयू तट पर 12 योजन (लगभग 144 किलोमीटर) लंबाई और 3 योजन(लगभग 36 किलोमीटर) चौड़ी में बसी हुई थी|यह नगर कई शताब्दी तक सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा है,अयोध्या मूल रूप से हिंदू मंदिरों का शहर है|  यहां जैन मत के अनुसार यहां 24 तीर्थ कारों में से 5 तीर्थ कारों का जन्म यही हुआ है|
  • अयोध्या पहले  कोसल  राज्य की राजधानी था, प्राचीन  उल्लेखो के अनुसार तब इसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मील था |दोस्तों यहां पर सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था उसके अनुसार यहां 20  बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहते थे |
  • दोस्तों अवध के पहले नबाव सादत अली ख़ाँ 1730 में इसे अपनी राजधानी बनाया, लेकिन वह यहाँ बहुत कम समय रह पाए थे। अवध के  तीसरे नवाब   शुजा-  उद- दौला यहाँ रहते थे, और उन्होंने नदी के  किनारे 1764 में एक दुर्ग का निर्माण करवाया था |उनका और उनकी बेगम का मक़बरा इसी शहर में स्थित है। 1775 में अवध की राजधानी को  लखनऊ ले जाया गया। 19वीं शताब्दी में अयोध्या का पतन हो गया |

अयोध्या और फैजाबाद ( Ayodhya and Faizabad in Hindi ) : 

दोस्तों कभी -कभी बहुत से लोगों को इन दोनों शहर में भ्रम होता है ,कई लोग इन दोनों शहर को एक ही शहर समझते हैं |आइए दोस्तों मैं आपको सरल शब्दों में समझाते हैं | इन दोनों शहरों का अपना अपना इतिहास है पर मैं आपको ज्यादा इतिहास पर लेकर नहीं जाएंगे बहुत ही संक्षेप में समझाने की कोशिश करेंगे-

  • फैजाबाद एक शहर है जो अयोध्या से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | फैजाबाद को अवध के सूबेदार नियुक्त किए गए एक ईरानी सावत अली खान ने 1722 ई.वी.में बसाकर अवध की पहली राजधानी बनाया था| जिसे बाद में नवाबों ने 1775 ई. वी  में लखनऊ ले जाया गया जिसके बाद फैजाबाद का पतन हो गया | इन वर्षों में खूबसूरत इमारतों का निर्माण करवाया गया यह शहर लखनऊ की तरह हमें नवाब कालीन दौर की याद ताजा करवाता है ,दोस्तों फैजाबाद एक खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर है | 
  • दोस्तों फैजाबाद शहर बसाने के बाद भी अयोध्या अपने धार्मिक स्वरूप और धार्मिक पराकाष्ठा के कारण हिंदू जनमानस के बीच हमेशा आस्था का केंद्र रहा |
  • दोस्तों जब हमारा देश अंग्रेजों के अधीन आया तो तब अंग्रेजों ने फैजाबाद शहर को एक जिला का दर्जा दिया और राम नगरी अयोध्या को भी इस जिले के अंतर्गत कर दिया वही व्यवस्था तब से लेकर नवंबर 2018 तक रही| उसके बाद योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार ने अयोध्या शहर को जिला घोषित कर दिया और फैजाबाद शहर को उसका प्रशासनिक मुख्यालय बना दिया | 
  • मेरे प्रिय पाठकों फैजाबाद ,लखनऊ के बाद यह दूसरा शहर है जिसकी इमारतें नवाब कालीन दिनों को  फिर से जीवंत कर देता है | फैजाबाद को बहुत से साहित्यकारों कवियों और स्वतंत्रता सेनानियों की जन्म भूमि और कर्म भूमि होने का गौरव प्राप्त है 

अयोध्या में कब क्या हुआ ( Ayodhya Mein Kab kya hua in Hindi ) :

मेरे प्यारे पाठको जैसा कि आप जानते हैं कि अयोध्या को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हमेशा तनाव रहा है और बहुत लंबे अरसे से देश की राजनीति और उन्नति को प्रभावित करता रहा है | 

दोस्तों मैं इस लेख में जितनी घटनाएं हुई हैं उनमें से कुछ घटनाओं का संक्षेप में वर्णन करते हैं- 

1528 :अयोध्या में एक स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया जिसे हिंदू अपने आराध्य देवता का जन्म स्थान मानते हैं ऐसा कहा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था| 

1853 : एक बार इस स्थान के पास संप्रदायिक दंगे हुए |

1994 : सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया |

1984 : कुछ हिंदुओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्री राम के जन्म स्थल को “मुक्त” कराने और वहां राम मंदिर का निर्माण कराने के लिए एक समिति का गठन किया उस समय बाद इस अभियान में भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने  नेतृत्व संभाल लिया | 

1989 : विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण के लिए अभियान और तेज कर दिया तथा विवादित स्थल के नजदीक मंदिर की नींव रखी | 

1992 :  शिवसेना ,विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया  |इस घटना के बाद देशभर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच दंगे भड़क उठे जिसमें 2000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी |

2001:बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर जनता में तनाव बढ़ गया और विश्व हिंदू परिषद ने इस विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण करने का अपना संकल्प फिर से दोहरा दिया |

जनवरी 2002: अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए उस समय के भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अयोध्या समिति का गठन किया | उस समय के वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए नियुक्त किया गया |

27 फरवरी 2002 : विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी और सैकड़ों हिंदू अयोध्या में इकट्ठा होने लग गए | जब हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या से लौट रहे थे तो जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे उस पर गोधरा  (गुजरात) में हुए हमले में 59 कार्यकर्ता मारे गए | 

  • दोस्तों उस रेलगाड़ी का नाम साबरमती एक्सप्रेस था जिसके S- 6 कोच में भीड़ द्वारा आग लगाई  गई थी इस घटना के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक रूप से दंगे शुरू हो गए|
  • ऐसे ही यहां बहुत सारे विवाद हुए आखिरकार में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर- बाबरी मस्जिद विवाद का हल निकाल दिया और राम मंदिर निर्माण का आदेश दे दिया | हम सभी को सौभाग्य मिला इस अपने जीवन काल में मंदिर निर्माण को देखने के लिए|

5 अगस्त 2020 राम मंदिर भूमि पूजन (5August 2020 Ram Mandir Bhumi Pujan in Hindi ) :

  • दोस्तों 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन और शिलान्यास करने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अयोध्या जा रहे हैं|

  • मंदिर का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 3 साल का लक्ष्य रखा गया है|

  • नया प्रस्तावित मंदिर 360 फीट लंबा,  235 फीट चौड़ा और  161 फीट ऊंचाई बनाने को अंतिम रूप दे दिया गया है ,मंदिर में 5 गुंबद होगा ,जिसके लिए भव्य राम मंदिर  निर्माण  की तैयारियां चल रही है इस तरह से  बनाया जा रहा है कि बहुत ही भव्य होगा |

  • जिन हस्तियों को विशेष रूप से बुलाया जाएगा उनमें  से लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण  सिह और विनय कटियार जैसे भगवा सियासत राजनीतिज्ञों और मंदिर आंदोलन से जुड़े शीर्ष संत भी शामिल होंगे। उनके अलावा भूमि पूजन स्थल पर मौजूद रहने वालों में मेजबान के तौर पर श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल होंगे।

अयोध्या में घूमने लायक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ( Top 10 tourist places visit in Ayodhya in Hindi ) :      

  • दोस्तों जैसा कि हमने बताया अयोध्या और फैजाबाद  दोनों शहर सटे हुए हैं तो अगर आप यहां  घूमने जाते हैं तो इन दोनों शहरों में आराम से घूम सकते हैं| वैसे यहां पर घूमने वाले बहुत सारे पर्यटक स्थल  हैं ,पर उनमें से हम महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की जानकारी दे रहे हैं| 1.  दशरथ भवन  2.  सीता की रसोई 3.  हनुमानगढ़ी 4.  राम की पौढ़ी 5.  नागेश्वर मंदिर 6.  कनक भवन 7.  तुलसी स्मारक भवन म्यूजियम 8.  गुलाब बाड़ी 9.  बहू बेगम का मकबरा 10. मोतीमहल

1.अयोध्या का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल दशरथ भवन (Dashrath Bhavan Ayodhya Ke Paryatansthal in Hindi )

  • दोस्तों दशरथ भवन शहर के मध्य में स्थित वह भवन है ,जहां भगवान राम के पिता और अयोध्या के राजा दशरथ का निवास स्थान था | यह एक भव्य महल है जिसको अच्छी तरह से सजाया गया है|
  • इस भवन के मंदिर में श्री राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियां लगी हुई है | इस मंदिर का प्रवेश द्वार बेहद बड़ा और रंगीन है| दोस्तों  मंदिर जाएं तो वहां का धार्मिक रंग जरूर  देखें ,यहां  साधु और संत नारंगी रंग के कपड़े पहनकर रामायण के दोहा और चौपाई का पाठ करते रहते हैं और साथ में  वाद्ययंत्र भी बजाते हैं|
  • दोस्तों यह  भवन अपने सभी कक्ष की की तुलना में काफी छोटा है जहां राजा दशरथ रहते थे| यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं और दर्शन करते हैं क्योंकि भगवान राम ने अपने जीवन के प्रारंभिक  समय और अपने भाइयों के साथ बचपन इसी क्षेत्र में बिताया था | 

2.अयोध्या के दर्शनीय स्थल सीता की रसोई मंदिर ( Sita Ki Rasoi Ayodhya in Hindi ):

  • दोस्तों वास्तव में सीता की रसोई कोई घर नहीं है बल्कि यह एक मंदिर है | मंदिर  के एक कोने में पुराने रसोईघर का एक मॉडल है जहां प्राचीन बर्तन आदि का नमूना है|
  • यह मंदिर राम जन्म भूमि के उत्तरी पश्चिमी भाग में स्थित है इस मंदिर में भगवान राम के सभी भाइयों और पत्नियों की मूर्ति लगी हुई है-

          भगवान राम की पत्नी सीता मां |

          लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला |

          भरत की पत्नी मांडवी

          शत्रुघ्न की पत्नी सुकृति |

  • दोस्तों उस दौरान रिवाज होता था होता कि नई बहू पूरे परिवार के लिए शगुन के तौर पर खाना पकाती थी | हालांकि विद्वानों का मानना है कि मां सीता ने अपने परिवार के लिए खाना नहीं बनाया था लेकिन पूरी मानव जाति के लिए यह स्थान माता अन्नपूर्णा के समान है|   

3.अयोध्या के पर्यटन में प्रमुख मंदिर हनुमान गढ़ी (Ayodhya ke Paryatan Mein Pramukh Mandir Hanuman Gadi Ayodhya in Hindi ) :

  • दोस्तों पवन पुत्र हनुमान को समर्पित  यह हनुमानगढ़ी अयोध्या रेलवे स्टेशन से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इस मंदिर तक जाने के लिए  76 सीढ़ी से होकर जाना होता है| पूरे देश भर से यहां श्रद्धालु आते हैं  ऐसा माना जाता है कि इस स्थान के भ्रमण से हनुमान के सच्चे भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है | भगवान राम ने हनुमान जी को अधिकार दिया था कि जो भक्त मेरे दर्शन करने आएगा उसे पहले तुम्हारा दर्शन पूजन करना होगा |

  • दोस्तों यह हनुमानगढ़ी अयोध्या के सबसे ज्यादा भ्रमण किए जाने वाले स्थानों में से एक हैं | मंदिर राज द्वार के सामने एक टीले पर स्थित है यहां से काफी दूर तक सब कुछ साफ साफ दिखाई देता है | मंदिर परिसर में मां अंजनी वह बाल हनुमान की मूर्ति है, जिसमें हनुमान जी अपने मां अंजनी की गोद में बालक रूप में लेटे हैं | हनुमानगढ़ी को लोग  हनुमान जी का घर भी कहते हैं|

  • दोस्तों इस मन्दिर के निर्माण के पीछे की एक कहानी प्रचलित है। सुल्तान मंसूर अली अवध का नवाब था। एक बार उसका इकलौता पुत्र गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था । जान बचने के आसार नहीं रहे, तो सुल्तान ने थक हार कर संकटमोचक हनुमान जी के चरणों में माथा रख दिया। हनुमान ने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम का ध्यान किया और सुल्तान के पुत्र की धड़कनें पुनः प्रारम्भ हो गई। अपने इकलौते पुत्र के प्राणों की रक्षा होने पर  नवाब मंसूर अली ने  हनुमान के चरणों में माथा टेक दिया था । जिसके बाद नवाब ने न केवल हनुमान गढ़ी मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया बल्कि उसने  ताम्रपत्र पर लिखकर ये घोषणा की कि कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई  भी अधिकार नहीं रहेगा और न ही यहां  चढ़ावे से कोई कर वसूल किया जाएगा। उसने 52 बीघा भूमि हनुमान गढ़ी व इमली वन के लिए उपलब्ध करवाई। 

  • वैसे दोस्तों इस हनुमान मंदिर के निर्माण के कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं मिलते हैं ,लेकिन कहते हैं कि अयोध्या न जाने कितनी बार बसी और उजड़ी, लेकिन फिर भी यहां एक स्थान जो हमेशा अपने मूल रूप में रहा वो है हनुमान टीला जो आज भी हनुमान गढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है।रावण  की  लंका से विजय के प्रतीक रूप में लाए गए सभी निशान इसी मंदिर में रखे गए  हैं| जो आज भी खास मौके पर बाहर निकाले जाते हैं उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। मन्दिर में विराजमान हनुमान जी को वर्तमान अयोध्या का राजा मानते है। श्रद्धालु कहते हैं कि हनुमान जी यहाँ एक गुफा में रहते थे और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे।

4.अयोध्या में घूमने लायक पर्यटक स्थल राम की पैड़ी (Ayodhya Mein Tourist Place Ram ki Paidi Ayodhya in Hindi ) : 

  . दोस्तों “राम की पैड़ी”  अयोध्या में ठीक उसी  तरह है जैसे हरिद्वार में “हर कीपैड़ी ” है|

 . यहां नया घाट है जहां श्रद्धालु अयोध्या में सरयू नदी में स्नान करते हैं| इस घाट पर भारी संख्या में भक्त स्नान  करने आते हैं और पवित्र सरयू नदी में डुबकी लगाते हैं|

5.अयोध्या के प्रसिद्ध  नागेश्वरनाथ मंदिर ( Nageshwarnath Temple Ayodhya in Hindi ) :

  • दोस्तों  यह मंदिर राम की पैड़ी पर स्थित है | जैसा कि आपको नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि यह मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है ,क्योंकि नागेश्वर नाथ   नाम भगवान शिव का होता है |  दोस्तों इस मंदिर में हर साल शिवरात्रि पर भारी मात्रा में श्रद्धालु आते हैं, इस मंदिर से शिव की बारात भी निकाली जाती है जिसमें बहुत ही आनंद आता है |

  • कहा जाता है कि नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था | जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थे तो उनका बाजूबंद खो गया था , यह बाजूबंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुछ से प्रेम हो गया था | वह कन्या शिवभक्त थी | राम के पुत्र कुश नहीं उसके लिए मंदिर बनवाया था | 

  • नागेश्वर नाथ मंदिर एकमात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल में सुरक्षित रहा ,जबकि बाकी शहर खंडहर में तब्दील हो चुका था | दोस्तों इसका अर्थ यह हुआ कि यह मंदिर अयोध्या में विक्रमादित्य द्वारा खोजा गया |

6.अयोध्या का कनक भवन ( Kanak Bhawan Ayodhya in Hindi ):

  • दोस्तों कनक भवन हनुमानगढ़ी के नजदीक स्थित है यह महत्वपूर्ण मंदिर है नगर का | इस मंदिर की खासियत सीता मां और भगवान राम के सोने के मुकुट वाली प्रतिमाओं को लेकर इसकी लोकप्रियता है | इसी वजह से कई लोग सोने का घर के नाम से जानते हैं इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1891 में कराया गया था |
  • इस भवन के बारे में एक कथा प्रचलित है कि कनक भवन राम विवाह के बाद माता कैकई ने सीता जी को मुंह दिखाई में दिया था|  जिसे भगवान राम और सीता जी ने अपना निजी भवन बना लिया ,उस समय का यह भवन 14 कोस में फैली अयोध्या नगरी में स्थित सबसे  दिव्य तथा भव्य महल था| 
  • दोस्तों संतों का मत है कि आज भी भगवान श्री राम सीता माता के साथ इस परिसर में विचरण करते हैं|इस आस्था पर विश्वास करते हुए संत जन और श्रद्धालु इस परिसर में आकर अपने आपको प्रभु के समीप अनुभव करते हैं| मंदिर परिसर में भगवान श्री राम का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है इसके अतिरिक्त भगवान श्रीराम को सजीव मानकर सावन में झूला भी झुलाया जाता है| 
  • जिस समय यह भवन सीता मां को मिला था, वह त्रेता युग की घटना थी| समय बीतने पर यह भवन नष्ट हो गया और खंडहर में तब्दील हो गया| लेकिन शास्त्रों और प्राचीन धार्मिक इतिहास के आधार पर इसी स्थान को कनक भवन माना गया| कनक भवन का निर्माण ओरछा राज्य के राजा  महेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी की देखरेख में कराया गया था|  वर्ष 1981 को उनके द्वारा प्राचीन मूर्तियों की स्थापना  की गई| 

7.अयोध्या में घूमने की ऐतिहासिक स्थान तुलसी स्मारक भवन संग्रहालय (Tulsi Smarak Bhawa Ayodhya in Hindi ): 

  • दोस्तों  “रामचरितमानस” और “हनुमान चालीसा” की रचना करने वाले गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति में निर्मित तुलसी स्मारक भवन अयोध्या में स्थित है|यहां एक ऐसा संगठन है जो अयोध्या शहर की सांस्कृतिक आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपरा का अध्ययन और वर्णन करता है|
  • दोस्तों इस भवन में रामायण कला और शिल्प पर आधारित स्थाई प्रदर्शनी और एक पुस्तकालय भी है|
  • इस संस्थान के भीतर सन 1988 में राम कंठ संग्रहालय स्थापित किया गया था| जिसमें भगवान राम के युग की प्राचीन वस्तुओं के संग्रह के माध्यम से इस नगर के इतिहास को सामने लाया जाता है| यहां पर नियमित रूप से  प्रार्थना भक्ति संगति और धार्मिक प्रवचन आयोजित होते हैं| 
  • स्मारक परिसर के भीतर सांस्कृतिक केंद्र में हर दिन शाम 6 बजे से 9 बजे के बीच रामलीला का प्रदर्शन होता है, जो पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।

8. अयोध्या में घूमने लायक जगह गुलाब बाड़ी (Ayodhya Me Ghumne Layak Jagah Gulab Bari Ayodhya in Hindi ): 

  • दोस्तों गुलाब बाड़ी अयोध्या के पास फैजाबाद में स्थित हैं| गुलाब बाड़ी एक बेहद सुंदर बगीचा है| इसकी गिनती शहर के सबसे सुंदर बगीचा में होती है| यह एक शानदार मकबरा है इस मकबरे का गुंबद बेहद विशाल का है|
  • दोस्तों मकबरे में प्रवेश के लिए दो दरवाजे हैं |यह आठवीं सदी में बगीचा निर्मित कराया गया था | इस बगीचे में आप सुंदर सुंदर फूलों की किस्म देख सकते हैं मुख्य तौर पर इसमें गुलाब के फूलों का किस्म  ज्यादा है|
  • गुलाब बाड़ी सुबह 4:00  बजे से शाम 7:00 बजे तक खुला रहता है| यह मकबरा चारों तरफ से गुलाब के फूलों से घिरा है| इसलिए इस जगह का नाम गुलाब बाड़ी पड़ा है ,यहां पर पानी के फव्वारे भी हैं| यहां पर बहुत ही आनंद की अनुभूति मिलता है| 
  • दोस्त अगर आप को जब भी अयोध्या जाने का को सौभाग्य मिले तो, आप गुलाब बाड़ी की सैर करना ना भूले आपको एक बेहद यादगार साबित हो सकता है|
  • गुलाब बाड़ी अवध के तीसरे नवाब  शुजा - उद- दौलाका मकबरा है| दोस्तों नवाबों ने फैजाबाद की खूबसूरत इमारतों के साथ इन्हें भी खूबसूरत बना दिया इनमें गुलाब बाड़ी, मोतीमहल और बहू बेगम की कब्र है|
  • शुजा - उद- दौला की पत्नी सुप्रसिद्ध बहू बेगम थी| इन्होंने 1743 में  नवाब से शादी की और फैजाबाद में रहना जारी रखा| 
  • शुजा - उद- दौला की कब्र अपने जीवन काल  के दौरान खुद ही निर्माण की गई थी|

9 .बहू बेगम का मकबरा ( Bahu Begum ka maqbara in Hindi ):

  • दोस्तों फैजाबाद में मकबरा रोड पर बहू बेगम का मकबरा “पूरब” के ताजमहल के रूप में चर्चित है| यह मकबरा फैजाबाद में सबसे ऊंची धरोहर है | इसके साथ ही अपने  गैर मुगल शैली के लिए  भी जाना जाता है|
  • दोस्तों जैसा कि आप लोग जानते हैं ताजमहल प्यार की निशानी के लिए प्रसिद्ध है ,उसी तरह यह मकबरा भी प्यार की निशानी के लिए प्रसिद्ध है| नवाब शुजा - उद- दौला अपनी पत्नी से बेइंतहा प्यार करते थे और उनके लिए ताजमहल जैसा मकबरा बनवाना चाहते थे लेकिन बीमारी के चलते उनकी मृत्यु हो गई उस समय तक मकबरे का कुछ काम ही पूरा हो पाया था| 
  • दोस्तों जब नवाब की मृत्यु हो गई तो उनकी पत्नी बहू बेगम ने अपने पति की दिल की इच्छा को पूरा करने के लिए मकबरे का निर्माण जारी रखा |कुछ समय बाद उनकी भी मृत्यु हो गई | जिसके बाद इसका निर्माण कार्य इनके सबसे मुख्य दरबार अली खान ने पूरा करवाया|
  • इस समय यह ऐतिहासिक मकबरा शिया वक्फ बोर्ड व भारतीय पुरातत्व विभाग की संपत्ति है|
  • दोस्तों शहर का एक अच्छा दृश्य बेगम की मकबरे के ऊपर से प्राप्त किया जा सकता है | बहू बेगम महान प्रतिष्ठा की एक महिला थी ,जिनकी सम्मान और गरिमा थी| फैजाबाद की अधिकांश मुस्लिम इमारतों का श्रेय उनके लिए जिम्मेदार है|

10. मोती महल ( Moti Mahal Ayodhya in Hindi ) :

  • पर्ल पैलेस के नाम से चर्चित इस मोती महल का निर्माण 1746 ईसा पूर्व में कराया गया था| यह फैजाबाद में स्थित है| अवध के नवाब  शुजा - उद- दौला  की बेगम रानी का निवास स्थान था | यह  शानदार इमारत मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है| 

अयोध्या कैसे पहुंचा जाए ( How To Reach Ayodhya in Hindi ):

  • दोस्तों अगर आप अयोध्या जाने की  मन बना रहें हैं तो ,बता दें कि अयोध्या सीधे मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से काफी कम जुड़ा है। लेकिन आप अगर उत्तर प्रदेश में हैं तो आसानी से अयोध्या की यात्रा कर सकते हैं। अयोध्या में अपना खुद का कोई  एयरपोर्ट नहीं है। लेकिन, यहां पर रेलवे स्टेशन उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से अयोध्या के लिए बसें भी आसानी से उपलब्ध हैं।

फ्लाइट से अयोध्या कैसे पहुंचे ( How to reach Ayodhya by flight In Hindi ):

 

  • दोस्तों अगर आप अयोध्या की यात्रा  फ्लाइट द्वारा करना चाहते हैं तो बता दें कि यहां का निकटतम एयरपोर्ट फैजाबाद एयरपोर्ट  है,  जो कि 8 किलोमीटर की दूरी पर  स्थित  है। इसके अलावा  दूसरा एयरपोर्ट  130 किलोमीटर की दूरी लखनऊ एयरपोर्ट  है।  लखनऊ एयरपोर्ट भारत के अधिकांश प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप लखनऊ हवाई अड्डे से अयोध्या पहुंचने के लिए कैब या टैक्सी किराये पर ले सकते हैं जो आपसे लगभग 1800 से 2500 रूपये तक चार्ज कर सकता है|

       .दोस्तों फैजाबाद एयरपोर्ट अभी बन रहा है|

 सड़क मार्ग से अयोध्या कैसे पहुंचे ( How to reach Ayodhya by Road In Hindi):    

            

  • दोस्तों उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सेवा 24 घंटे उपलब्ध हैं,  सभी छोटे बड़े स्थान से यहां पहुंचना बहुत आसान है।
  • अयोध्या, प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे  लखनऊ से लगभग 135 किलोमीटर दूर  ,वाराणसी से 203 किलोमीटर ,इलाहाबाद से 167 किलोमीटर,  गोरखपुर से 140 किलोमीटर दूर  और दिल्ली से लगभग 687 किलोमीटर।  लखनऊ, दिल्ली और गोरखपुर से फैजाबाद को बसें आसानी से उपलब्ध हैं।

 ट्रेन से अयोध्या कैसे पहुंचे हैं ( How To Reach Ayodhya by Train In Hindi ):                

 

  • दोस्तों फैजाबाद व अयोध्या रेलवे स्टेशन लगभग सभी प्रमुख महानगरों एवं नगरों से भलि-भांति जुड़े हुए हैं।
  • फैजाबाद रेलवे मार्ग द्वारा लखनऊ से 128 किलोमीटर, गोरखपुर से 171 किलोमीटर, इलाहाबाद से 157 किलोमीटर एवं वाराणासी से 196 किलोमीटर है।
  • अयोध्या रेलवे मार्ग द्वारा लखनऊ से 135 किलोमीटर, गोरखपुर से 164 किलोमीटर, इलाहाबाद से 164 किलोमीटर  एवं वाराणासी से 189 किलोमीटर है।

अयोध्या का नक्शा(Ayodhya Map):

  • दोस्तों हमारे इस लेख से आपको सही जानकारी अयोध्या घूमने के लिए मिली हो तो आप लोग प्लीज कमेंट में जरूर अपनी राय दीजिए-