पनचक्की औरंगाबाद महाराष्ट्र - Panchakki Aurangabad in Hindi

सभी पाठकों को हमारा नमस्कार। आज हम अपने इस लेख के जरिये आपको औरंगाबाद में स्थित वैज्ञानिक सोच और ऐतिहासिक पनचक्की की सैर तो कराएँगे साथ ही उसकी संपूर्ण जानकारी भी आपके साथ साँझा करेंगे। इस अद्भुत और अनोखी सैर और संपूर्ण जानकारी के लिए लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ियेगा।

पनचक्की औरंगाबाद महाराष्ट्र - Panchakki Aurangabad in Hindi

औरंगाबाद की पनचक्की - Panchakki of Aurangabad in Hindi :

  • पनचक्की या पानी से चलने वाली चक्की। पनचक्की महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद शहर में स्थित है। मध्यकालीन समय में यह एक अद्भुत विरासत है क्योंकि यह उस समय के वैज्ञानिक विचारों को प्रदर्शित करती है।
  • पहाड़ के झरने के द्वारा पानी की ऊर्जा के माध्यम से चलने वाली यह पनचक्की बाबा शाह हज़रत मुसाफिर की दरगाह से जुड़ी हुई है और इस पनचक्की के द्वारा दरगाह पर आने वाले सूफी-संतो और कारिंदों की रोटी के लिए आटा पीसा जाता था।   

औरंगाबाद की पनचक्की का इतिहास - History of Aurangabad’s Panchakki in Hindi :

  • इस पनचक्की का निर्माण बाबा शाह हज़रत फुसाफिर द्वारा कराया गया था लेकिन दरगाह परिसर में 1695 ई. में लगभग अन्य इमारतों का निर्माण तुर्कज खान द्वारा कराया गया था। मस्जिद के बाहर बड़े-बड़े पत्थरों से आयताकार जलाशय बनाकर लगभग 20 साल बाद इस पनचक्की की स्थापना के उद्देश्य को पूरा किया गया था। 
  • इस दरगाह में इस पनचक्की के साथ एक मस्जिद, एक मदरसा, एक कचहेरी, बाबा शाह हज़रत का मकबरा, एक मंत्री का घर, एक सराय और जनाना मकान भी हैं।  

औरंगाबाद की पनचक्की की प्रक्रिया - Process of Aurangabad’s Panchakki in Hindi :

  • पनचक्की से लगभग 8 कि.मी. की दूरी पर जठवाड़ा की पहाड़ियों को खोदने पर 30 फूट की ऊँचाई से गिरते झरने को देखा गया।
  • इस झरने के पानी को एकत्रित करके मिट्टी कर पाइपों के सहारे भूमिगत नहर के माध्यम से 8 कि.मी. तक लाकर दरगाह की पनचक्की से जोड़ा गया।
  • मिट्टी के 20 फूट ऊँचे पिलर से पानी को नीचे मस्जिद के सामने बने आयताकार जलाशय के गड्ढे में गिराया गया जिससे उस पानी से ऊर्जा उत्पन्न की जा सकी।
  • अंदर हॉल में एक मिट्टी का चक्का है जो इससे उत्पन्न हुई ऊर्जा से घूमता है और उस समय इसी पर सभी कारिदों के लिए आता इसी चक्की पर पीसा जाता था।
  • जलाशय के अतिरिक्त जल को खाम नदी में स्थान्तरित कर दिया जाता था जो वाकई उस समय के उदार और वैज्ञानिक विचारों की झलक प्रस्तुत करता है।
  • पनचक्की के हॉलों का प्रयोग यहाँ आने वाले यात्रियों द्वारा किया जाता है जो 31 फव्वारों से सजे हुए हैं।

औरंगाबाद की पनचक्की में देखने लायक अन्य जगहें - Different Places to See in Aurangabad’s Panchakki in Hindi :

  • इस पनचक्की के हॉलों से खाम नदी का एक बेहद खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है।  
  • बाबा शाह हज़रत मुसाफिर की आध्यात्मिक कब्र के साथ उनके शिष्य बाबा शाह महमूद की भी कब्र यहाँ मौजूद है।
  • साथ ही यहाँ एक बेहद ऐतिहासिक मस्जिद भी मौजूद है।
  • पनचक्की के दक्षिणी किनारे पर एक विशाल बरगद का पेड़ है जिसके ऊपर लिखा हुआ है कि यह लगभग 600 साल पुराना पेड़ है। यह पेड़ पनचक्की की सुन्दरता में चार चाँद लगाता है।

वर्तमान समय में औरंगाबाद की पनचक्की - Today Aurangabad’s Panchakki in hindi :

  • आज औरंगबाद की इस पनचक्की में कई कीमती पुस्तकों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुस्तकालय खोल दिया गया है। इस पुस्तकालय में स्वतंत्रता संग्राम के समय से लेकर 100,000 पुस्तकों को संग्रहित किया गया।
  • प्रशासनिक कारणों के चलते 1970 में काफ़ी पुस्तकों को हैदराबाद के पुस्तकालय में स्थान्तरित कर दिया गया था। लेकिन आज भी यहाँ इतिहास, कानून, चिकित्सा, अरबी, सूफीवाद और दर्शन से संबंधित 25,00 पुस्तकें संग्रहित हैं। जो उर्दू, फ़ारसी भाषा में दार्शनिक सूफी, संतों और विद्वानों द्वारा लिखी गईं थीं।
  • यदि आप भी कुछ नया सीखने और देखने के साथ इतिहास प्रेमी हैं तो यह स्थान आपकी यात्रा के लिए बिलकुल उपयुक्त है क्योंकि यहाँ आकर हम समझ सकते हैं कि जब मनुष्य के पास कोई यांत्रिक सुविधा नहीं थी तब भी उसने क़िस प्रकार मानव श्रम की अपेक्षा अपनी बुद्धि के जरीय पानी की ऊर्जा का उपयोग कर इस पनचक्की का निर्माण किया और लाखों फकीरों और कारिदों का पेट भरा।