कुशीनगर के दर्शनीय स्थल (Tourist places to visit in kushinagar)

मेरे प्रिय पाठक आपका प्रेम पूर्वक नमस्कार हमारे इस लेख को पढ़ने के लिए| इस लेख में कुशीनगर के पर्यटक स्थल का संपूर्ण वर्णन करेंगे|कुशीनगर भगवान बुद्ध को समर्पित है|ऐसा माना जाता है कि यहीं पर गौतम बुद्ध ने अपने जीवन की आखिरी सांस ली थी, जिस वजह से इसे प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल भी माना जाता है।

कुशीनगर के दर्शनीय स्थल (Tourist places to visit in kushinagar)

कुशीनगर घूमने की संपूर्ण जानकारी :

कुशीनगर नगर की परिचय (Introduction of Kushinagar):

  • कुशीनगर भारतीय राज्य, उत्‍तरप्रदेश में एक महत्‍वपूर्ण बौद्ध तीर्थ  स्थान है | कुशीनगर, गोरखपुर से लगभग 53 किमी की दूरी पर स्थित है। कुशीनगर उत्तर प्रदेश का एक जिला है | कुशीनगर  जिले का मुख्यालय पडरौना है |  कुशीनगर जिला पहले देवरिया जिले का भाग था ,वर्तमान समय में कुशीनगर एक जिला है।कुशीनगर जिले का गठन 13 मई 1994 में किया गया था | कुशीनगर का नाम नाम पहले कसया बाजार था |कुशीनगर जिले के पूर्व में  बिहार राज्य, दक्षिण-पश्चिम में  देवरिया, पश्चिम में  गोरखपुर, उत्तर-पश्चिम में  महाराजगंज स्थित हैं। 

  • कुशीनगर एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल है क्योंकि यहां कई देशों के सुंदर बौद्ध मंदिर है |यहां पर देश भर के बौद्ध तीर्थ यात्री  घूमने के लिए आते हैं | यहां की लोकल भाषा भोजपुरी  बोली जाती है| कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा पर एक माघ मेला लगता है| इसी स्थान पर महात्मा बुद्ध ने महापरिनिर्वाण (मृत्यु) प्राप्त किया था।महापरिनिर्वाण मंदिर में लेटे हुए बुद्ध की विशालकाय मूर्ति 1876 की खुदाई में प्राप्त हुई थी।
  • बौद्ध स्‍थलों के अलावा, कुशीनगर में सूर्य मंदिर भी है जिसे मूल रूप से गुप्‍त काल के दौरान बनवाया गया था |इसके अलावा, यहां कई दर्शनीय स्‍थल है जैसे कुबेर अष्‍टन, जो भगवान भोलेनाथ  को समर्पित मंदिर है। गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था | 
  • आज कुशीनगर में म्यांमार बुद्ध विहार,थाईलैंड बुद्ध विहार,कोरिया बुद्ध विहार,चीनी बुद्ध विहार,जापानी बुद्ध विहार,श्री लंका बुद्ध विहार, कम्बोडिया बुद्ध विहार, एकयुप्रेशर परिषद्, प्रबुद्ध सोसाइटी, भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार एवं भिक्षु संघ सेवारत है| 

कुशीनगर नगर का इतिहास (Kushinagar history in Hindi):

  • कुशीनगर  जिला भगवान राम के पुत्र कुश का राजधानी हुआ करता था | कुशीनगर का नाम  कुश नाम पर रखा गया है |गंडक नदी के किनारे कुशीनगर बसा है | कुशीनगर का इतिहास अत्यन्त ही प्राचीन व गौरवशाली है |छठी शताब्दी में खुदाई के दौरान  बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा मिली थी | प्राचीन काल में मल्ल वंश की राजधानी हुआ करता था | 
  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने पावानगर (इस समय में फाजिलनगर) में ही परिनिर्वाण प्राप्त किया था। इन दो धर्मों के अलावा प्राचीन काल से ही यह स्थान सनातन हिन्दू धर्मावलंम्बियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है| यहां के अधिकांश स्मारकों का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था|
  • दोस्तों मौर्य युग में कुशीनगर की उन्नति विशेष रूप से हुई।  परंतु  उत्तर मौर्यकाल में इस नगर की महत्ता कम हो गई।  गुप्त युग में इस नगर ने फिर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त किया। चंद्रगुप्त द्वितीय ,विक्रमादित्य के काल में यहाँ अनेक विहारों और मंदिरों का निर्माण हुआ। बुद्ध-पूर्व युग में यह कुशावती के नाम से विख्यात था।
  •  जनकपुर से अयोध्या लौटने के लिए भगवान श्री राम और उनके साथियों ने पडरौना (वर्तमान में कुशीनगर का मुख्यालय ) से 10 किलोमीटर पूरब से होकर बह रही  बांसी नदी को पार किया था।  दोस्तों आज भी बांसी नदी के इस स्थान को “रामघाट”के नाम से जाना जाता है। हर साल यहां भव्य  और सुंदर मेला लगता है  यहां पर  लाखों श्रद्धालु आते हैं। बांसी नदी के इस घाट को स्थानीय लोग इतना महत्व देते हैं कि “सौ काशी” न एक ‘बांसी' की कहावत ही बन गई है। मुगल काल में भी यह अपनी खास पहचान रखता था।

कुशीनगर के पर्यटक स्थल (Tourist place in Kushinagar in Hindi):

कुशीनगर स्थल भगवान बुद्ध को समर्पित है इसलिए यहां के ज्यादातर पर्यटक स्थल भगवान बुद्ध के नाम पर हैं इसके अलावा यहां पर हिंदु  मंदिर भी है| इस लेख में कुछ महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल का वर्णन संक्षेप में कर रहे हैं, जो इस प्रकार हैं| 

1.महापरिनिर्वाण मंदिर.                            

2. चाइनीज मंदिर.

3. कुशीनगर संग्रहालय.

4. वाट थाई मंदिर.

5.इंडो - जापान - श्रीलंका मंदिर.

6.कुबेर अष्‍टन.

7.रामभर स्तूप.

8.सूर्य मंदिर.

9. मेडीटेशन पार्क.

10.निर्वाण स्तूप.

1.महापरिनिर्वाण मंदिर (Mahaparinirvana Temple in Hindi):

कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर, पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में भगवान गौतम बुद्ध की 6.1 मीटर लंबी  प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में रखी है। यह मूर्ति उस काल को दर्शाती है जब 80 वर्ष की आयु में भगवान बुद्ध ने अपने पार्थिव शरीर को छोड़ दिया था और सदा - सदा के लिए जन्‍म और मृत्‍यु के बंधन से मुक्‍त हो गए थे, यानि उन्‍हे मोक्ष की प्राप्ति हो गई थी।  यह सुंदर प्रतिमा चुनार के बलुआ पत्थर को काटकर बनाई गई थी। ।कहा जाता है कि हरीबाला नामक बौद्ध भिक्षु ने गुप्त काल के दौरान यह प्रतिमा मथुरा से कुशीनगर लाया था। इस प्रतिमा   में मरणासन्न  मुद्रा में भगवान गौतम  बुद्ध को सीधी करवट लेटे हुए दिखाया गया है। इसके नीचे लिखी हुई तारीख के मुताबिक यह प्रतिमा पांचवीं सदी की है।

2.चाइनीज मंदिर (Chinese Temple in Hindi):

कुशीनगर में स्थित है चाइनीज मंदिर सभी मंदिरों में सबसे आधुनिक है | इस मंदिर में रखी बुद्ध की मूर्ति चीनी शैली में बनाई गइ है| यह मंदिर चीनी और वियतनाम वास्‍तुशिल्‍प डिजायन के मिश्रण से बनी एक रंगबिरंगी और अद्वि‍तीय संरचना है| लाफिंग बुद्धा   (गोल्डन कलर) की भी मूर्ति  मंदिर के अंदर बनी हुई है |मंदिर के डिजाइन में ड्रैगन का बहुत ज्यादा प्रयोग किया गया है,  इस मंदिर के अंदर जाने पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं| मंदिर परिसर में सुंदर गार्डन बना हुआ है जहां आप अच्छा अपना टाइम बिता सकते हैं|

 3.कुशीनगर संग्रहालय (Kushinagar Museum in Hindi):

  • इस संग्रहालय में कुशीनगर और उसके आसपास के क्षेत्र से संबंधित इतिहास और संस्‍कृति  को प्रदर्शन किया गया है, जिसमें कई पुरातत्व चीजों को भी रखा गया है। इनमें विशेष रूप से  भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े  सामान रखे हैं जिनमें  मूर्तियां, वास्‍तुकला के अवशेष, पीतल की मूर्तियां, बैनर  फोटो ,सिक्‍के, ईटें और कई अनूठी चीजें शामिल है।

  • इस संग्रहालय का मुख्‍य आकर्षण यहां रखी बुद्ध की  प्रतिमा है ,जो ध्‍यान की मुद्रा में है। इस मूर्ति को गांधार कला विश्‍वविद्यालय के सिद्धांतों से बनाया गया है।यह संग्रहालय सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है,और सोमवार को बंद रहता है|

  • यह संग्रहालय, सिटी बस स्‍टैंड से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह संग्रहालय, महापरिनिर्वाण मंदिर से आधा किलोमीटर और कासिया बस स्‍टैंड से 3 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ है।

4.वाट थाई मंदिर (Wat Thai Temple in Hindi): 

दोस्तों वाट थाई मंदिर  बौद्ध वास्‍तुकला शैली में बना हुआ है ,जो 10 एकड़ के परिसर में फैला हुआ है।इस मंदिर के अलावा, परिसर में मठ, गार्डन, स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, स्‍कूल और एक पुस्‍तकालय स्थित है। यह कुशीनगर जिला के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। इस मंदिर में  प्रत्येक वर्ष हजारों थाईलैंड के यात्री दर्शन करने आते है। 

इस मंदिर का निर्माण थाईलैंड सरकार द्वारा किया गया है । यह मंदिर सफेद पत्थरों से 2 फ्लोर में बना हुआ है। ग्राउंड फ्लोर बौद्ध भिक्षुओं के ध्‍यान और साधना के लिए है, दूसरा फ्लोर  सभी पर्यटकों के लिए खुला है। अष्टधातु से निर्मित भगवान बुद्ध की मूर्ति बनी हुई है।  इस मंदिर का वास्‍तु थाईलैंड के मंदिरों जैसा बना हुआ है। मंदिर के ऊपर भाग पर सोने की परत लगाई गई है। मंदिर परिसर के चारों ओर  सुंदर  गार्डन है। गार्डन की पौधों का विशेष आकार भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता  है। 

5. इंडो - जापान - श्रीलंका मंदिर (Indo-Japan-Srilanka Temple In Hindi): 

 

  • दोस्तों इंडो - जापान - श्रीलंका मंदिर, तीन देशों के बौद्ध अनुयायियों के सहयोग को प्रदर्शित  करता है। इस मंदिर में भगवान बुद्ध की अष्‍ट धातु  की मूर्ति स्‍थापित है|  इस मूर्ति को जापान से लाया गया था और इसके निर्माण के लिए जापानी राजशाही के द्वारा वित्‍त पोषिण दिया गया था। जापान से लाई हुई मूर्ति  2 टुकड़ों में थी , स्थापना करते समय इन दोनों टुकड़ों को जोड़ दिया गया था। 

6. कुबेर अष्‍टन (Kuber Asthan in Hindi):

दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं भगवान कुबेर पैसा के देवता हिंदू धर्म में कुबेर का स्थान पहले हैं | इस मंदिर को पडरौना के राजा ने बनवाया था | 

7.रामभर स्तूप (Ramabhar Stupa in Hindi):

  • दोस्तों यह स्तूप 15 मीटर ऊंचा  है ,महापरिनिर्वाण मंदिर से लगभग 1.2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार माना जाता है कि,  रामभर  स्तूप उसी स्थान पर बना है जहां  बुद्ध को 483 ईसा पूर्व मे दफनाया गया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि रामभर स्तूप महात्मा बुद्ध की मृत्यु के समय कुशीनगर पर शासन करने वाले मल्ल शासकों द्वारा बनवाया गया था।
  • रामभर स्तूप एक टीले पर बना हुआ है , यह कुशीनगर और देवरिया रोड पर स्थित है |इसे ईंटों की सहायता से बनाया गया है। इसका आधार 47.24 मीटर और ऊंचाई 14.9 मीटर है। इसका ऊपरी भाग एक ड्रम के आकार का है |

8. सूर्य मंदिर (Sun Temple Kushinagar in Hindi):

  • कुशीनगर के सूर्य मंदिर में स्थापित मूर्ति  गुप्तकालीन है। यह मूर्ति  नीलम धातु से निर्मित है| इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भारत के साथ पड़ोसी देश नेपाल ,म्यांमार और श्रीलंका से भी  टूरिस्ट आते हैं। यहां हर साल नवंबर में होने वाला सूर्य महोत्सव लोगों को  बहुत ही आकर्षित करता  है।
  • सूर्य मंदिर की ,मूर्ति  की ऊंचाई लगभग चार फीट है। सूर्य मूर्ति जब मिली थी उस समय सात घोड़ों के रथ वाली सवारी थी। 25 साल पहले मंदिर में  चोरी हुई थी, चोरों ने मूर्ति    को क्षति  किया तथा बल्कि रथ व घोड़ों को काट कर  अपने साथ ले गए। 
  • ऐसा कहां जाता है कि सोमवार और शुक्रवार के दिन सूर्य  मंदिर में दर्शन करने का सबसे अच्‍छा दिन होता है।

9. मेडीटेशन पार्क (Meditation Park in Hindi):

  • इस पार्क को भारत और जापानी परियोजना के अंर्तगत 1992 - 1993 में 6 लाख रूपए की लागत से बनाया गया है।  जैसा कि आपको नाम से ही पता चल रहा है कि यह पार्क ध्यान और मेडिटेशन के लिए बनाया गया है वहां का वातावरण बहुत ही शांत रहता है| यह पार्क निर्वाण मंदिर के पास में ही स्थित है

10. निर्वाण स्तूप ( Nirvana Stupa in Hindi):

  • यह स्तूप 'निर्वाण चैत्‍य' के नाम से भी लोकप्रिय है, जो  “महापरिनिर्वाण मंदिर” के पीछे स्थित है |ईंट से बने इस विशाल स्तूप को 1876 में खोजा गया था। इस स्तूप की ऊंचाई 2.74 मीटर है। इस स्थान की खुदाई से एक तांबे की नाव मिली है। इस स्‍मारक को गौतम बुद्ध का घर माना जाता है। बाद में  इस स्मारक स्‍मारक को  सम्राट अशोक के द्वारा और विकसित किया गया था।

कुशीनगर कैसे पहुंचे (How to Reach Kushinagar In Hindi): 

कुशीनगर  हवाई जहाज ,रेलवे  तथा बस के द्वारा हम आसानी से पहुंच सकते हैं |

1.हवाई जहाज से कैसे पहुंचे (How to Reach Kushinagar by flight):

  • दोस्तों कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है |यह अभी तक अच्छी तरह से चालू नहीं है ,जब या एयरपोर्ट चालू हो जाएगा तो यहां पर खाड़ी के देशों तथा अन्य बड़े एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी बन जाएगी |  
  •  कुशीनगर के अलावा गोरखपुर में भी एयरपोर्ट है  इस  एयरपोर्ट से रोज  मुंबई , दिल्ली ,लखनऊ तथा अन्य स्थानों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट  हैं| गोरखपुर एयरपोर्ट से कुशीनगर  की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है | 

2.ट्रेन से कैसे पहुंचे (How to Reach Kushinagar byTrain):

  • कुशीनगर के नजदीक पडरौना रेलवे स्टेशन तथा देवरिया सदर रेलवे स्टेशन है |इन स्टेशन से सभी जगह के लिए ट्रेन की कनेक्टिविटी नहीं मिलेगा लेकिन आप गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाएं तो यहां से इन स्टेशन के लिए ट्रेन चलती है| गोरखपुर रेलवे स्टेशन से सभी शहर में कनेक्टेड है |आप अपने सुविधानुसार रेलवे की समय सारणी देख लें उसके अनुसार तय करें कि आपको कैसी जाना है| 

 3.सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे (How to Reach Kushinagar by Road):

कुशीनगर से जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 28 इसे अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ता है। राज्य के प्रमुख शहरों से यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। गोरखपुर से कुशीनगर जाने का समय लगभग एक घंटा 20 मिनट लगता है| कुशीनगर के लिए गोरखपुर से एसी और नॉन एसी बस उपलब्ध है| 

 यात्रियों के  लिए टिप्स (tips for tourist in Kushinagar) : 

  • दोस्तों कुशीनगर  के सभी पर्यटक स्थल घूमने के लिए 2 दिन और एक रात में फुल मस्ती के साथ घूम सकते हैं |यहां पर सबसे ज्यादा आपको  फॉरेनर्स दिखेंगे क्योंकि बौद्ध धर्म का आस्था का केंद्र है | दोस्तों यहां पर होटल लेने के लिए आप किसी भी दलाल के चक्कर में ना आए| आप डायरेक्ट किसी होटल में जाकर बात करें या फिर ऑनलाइन बुक करें|यहां पर आप धर्मशाला और लॉज भी बुक कर सकते हैं | Pathik Niwas hotel  उत्तर प्रदेश टूरिज्म द्वारा संचालित है आप यहां भी पता कर सकते हैं हो सकता है शायद यहां पर कम पैसा लगे| किसी प्रकार की और भी सहायता के लिए आप REDGOTRIP से कांटेक्ट कर सकते हैं | 

 सबसे अच्छा समय कुशीनगर घूमने का (Best time to visit in Kushinagar) :

  • यहां पर घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम सर्दियों का होता है |आप यहां अक्टूबर से मार्च तक घूमने जा सकते हैं क्योंकि इस मौसम में यहां पर गर्मी कम पड़ेगा|