वाराणसी में घूमने की जगह - Varanasi Yatra in hindi

दोस्तों हम अपने इस लेख में बनारस के पर्यटन स्थल तथा बनारस का परिचय और बनारस का इतिहास का संक्षेप में वर्णन करेंगे जिससे कि जब आप बनारस बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने आए तो हमारी जानकारी की सहायता से आप आसानी से बनारस  घूम सकते हैं | 

वाराणसी में घूमने की जगह - Varanasi Yatra in hindi
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वाराणसी घूमने की संपूर्ण जानकारी - Varanasi tourist places in hindi

  वाराणसी की परिचय और वाराणसी के दर्शनीय स्थल 

  • दोस्तों  वाराणसी (Kashi Varanasi) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित है | यह शहर हिंदुओं के लिए बहुत ही खास स्थलों में से एक है | यहां पर कई सारे श्रद्धालु मुक्ति और शुद्धिकरण के लिए आते हैं, दोस्तों यहां पर आने वाले सभी  टूरिस्ट  अपने आप को बहुत ही हल्का महसूस करते हैं तथा यहां के तीर्थ स्थलों के दर्शन करके अपने आप को बहुत ही धन्य महसूस करते हैं |
  • दोस्तों वाराणसी के घाट, मंदिर ,गलियां  तथा अन्य पर्यटन स्थल भारतीय और विदेशी टूरिस्ट को बहुत ही आकर्षित करता है| यह नगर हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी उसे पवित्र माना जाता है |
  • दोस्तों वाराणसी हिंदू धर्म के सबसे पवित्र शहरों में से एक हैं ,इस वाराणसी को लेकर हिंदू धर्म में एक बड़ी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर मृत्यु को प्राप्त हो जाए या उसका अंतिम संस्कार काशी में किया जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है| अर्थात उस व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है इसलिए इस स्थान को मुक्ति स्थल भी कहा जाता है| इस नगरी के बारे में लोगों का अटूट विश्वास है कि यहां बहने वाले पवित्र गंगा नदी में यदि कोई डुबकी लगा ले  तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं |यहां पर कई टूरिस्ट गंगा नदी में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय डुबकी लगाना  एक अनोखा और यादगार अनुभव रहता है |दोस्तों वाराणसी के मुख्य घाटों पर हर रोज शाम को आरती (प्रार्थना) का आयोजन किया जाता है| 
  • दोस्तों वाराणसी को भगवान शिव  निवास स्थान कहा जाता है इसीलिए यहां काशी विश्वनाथ का मंदिर स्थित है| जो भगवान शिव को समर्पित है काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा यहां एक नया विश्वनाथ मंदिर है जो वाराणसी के बीएचयू परिसर में बना हुआ है |
  • दोस्तों हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का  घराना यहीं वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है|  भारत के कई दार्शनिक लेखक , संगीतज्ञ, कवि  इसी नगरी में रहे हैं  जिसमें कबीर रविदास ,स्वामी रामानंद ,मुंशी प्रेमचंद्र,जयशंकर प्रसाद ,आचार्य रामचंद्र शुक्ला ,गिरिजा देवी ,पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ,बिस्मिल्लाह खान और भी  आदि कुछ हैं| परम पूजनीय गोस्वामी तुलसीदास जी ने हिंदू धर्म का “रामचरितमानस ग्रंथ” यही लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन इस काशी के निकट सारनाथ में दिया था|

वाराणसी की इतिहास - Varanasi history in hindi :

  • दोस्तों इस नगर  की उत्पत्ति उस समय  की है जब भगवान भोलेनाथ ने पार्वती से शादी की थी और इस  नगर को अपने   रहने की जगह चुना था। इसके बाद आर्यों ने इस नगरी में आकर  रहने लगे और यहां पर रेशम, मलमल, हाथी दांत और इत्र आदि  वस्तुओं का व्यापार शुरू कर दिया । आपको बता दें कि अफगान आक्रमण और मुस्लिम शासन  के समय इस  नगर को अपने विनाशकारी  दिन से गुजरना पड़ा था, उस समय बहुत सारे मंदिरों का विनाश हुआ था। लेकिन मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में इस  स्थान को अपना गौरव वापस मिला।काशी पवित्र सप्तपुरिया में से एक है |
  • दोस्तों महाभारत के दिनों में काशी भारत के समृद्ध जनपदों में से एक था| महाभारत में एक कथा लिखा गया है उसके अनुसार एक स्वयंवर में पांडव और कौरव के पितामह भीष्म ने काशी नरेश के तीन पुत्रियों का अपहरण किया था , इस अपहरण के  बाद काशी और हस्तिनापुर में शत्रुता हो गई | जिस कारण काशी नरेश महाभारत के युद्ध में पांडवों की ओर से लड़ रहे थे |कई सालों बाद गंगा की बाढ़ से हस्तिनापुर डूब गया तब पांडव के वंशज वर्तमान इलाहाबाद जिले में यमुना किनारे कौशांबी में नई राजधानी बना कर बस गए ,उसका राज्य  वत्स कहलाया और काशी पर वत्स का अधिकार हो गया था|
  •  18 वीं शताब्दी में वाराणसी स्वतंत्र काशी राज्य बन गया था और बाद में ब्रिटिश शासन के अधीन मुख्य रूप से व्यापारिक और धार्मिक केंद्र रहा| ब्रिटिश प्रशासन ने वाराणसी को एक नया भारतीय राज्य बनाया और रामनगर को इसका मुख्यालय बनाया | काशी नरेश अब भी रामनगर किले में रहते हैं  यह किला वाराणसी के पूर्व में गंगा किनारे बना हुआ है| काशी नरेश राजा बलवंत सिंह ने  बलुआ पत्थर  से 18 वीं शताब्दी में करवाया था|यह किला मुगल स्थापत्य शैली में नक्काशीदार जो खुले प्रांगण और गुंबददार मंडप से सुसज्जित बना है| काशी नरेश का एक और महल है ,यह शिवाला घाट के नजदीक महाराजा चैत सिंह  ने बनवाया था 
  • दोस्तों रामनगर किला और इसका संग्रहालय बनारस के राजाओं की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित हैं| आज भी काशी नरेश नगर के लोगों में सम्मानित हैं, यह नगर के धार्मिक अध्यक्ष माने जाते हैं  यहां के लोग इन्हें भगवान शिव का अवतार भी मानते हैं |काशी नरेश नगर के प्रमुख सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी बड़े धार्मिक गतिविधियों के अभिन्न अंग रहे हैं |
  • अलाउद्दीन खिलजी ने लगभग 1000 मंदिरों को नष्ट कर धराशाई कर दिया था| इस तोड़फोड़ में विश्वनाथ जी का मंदिर भी था, किंतु सन 1584 में सम्राट अकबर के राजस्व मंत्री की सहायता से विश्वनाथ जी का मंदिर  फिर से बनवाया | औरंगजेब ने काशी के प्राचीन मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाई जो आज ही है| यही नहीं उसने हजारों मंदिरों को नष्ट कर दिया जिसके कारण उस काल में 20 मंदिर भी गिन पाना बहुत मुश्किल हो गया था | 

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